न्यूज मिथिला डेस्क : दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में राजद के अनिल कुमार झा और भाजपा के सर्वेश कुमार के बीच सरोज कुमार झा की दावेदारी भी चर्चा का विषय बन सकती है। सरोज कुमार झा को हल्के में आंकना चुनावी समीकरणों को समझने में चूक साबित हो सकता है।
राजनीतिक और संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाले सरोज कुमार झा की मधुबनी और दरभंगा में अच्छी पकड़ होने की चर्चा है। उनके समर्थकों का मानना है कि चुनाव में ऐसे मतदाताओं की भूमिका भी अहम हो सकती है, जो खुलकर अपनी पसंद जाहिर नहीं करते, लेकिन मतदान के दिन निर्णायक साबित हो सकते हैं।
आरएसएस के भीतर उनकी मजबूती, ब्राह्मण समाज के बीच संपर्क और उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक पहचान भी चर्चा के बिंदु हैं। अविवाहित होने के कारण सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रियता और समय देने की क्षमता को भी उनके व्यक्तित्व के संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि, इन पहलुओं का वास्तविक चुनावी प्रभाव मतदाताओं के रुझान और मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि मुकाबले का आकलन केवल चर्चित चेहरों के आधार पर करना पर्याप्त नहीं होगा।
स्नातक चुनाव में असली ताकत वह वोट भी होता है, जो प्रचार में दिखाई नहीं देता, लेकिन नतीजों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है।
