पीएम मोदी के शासन में मिथिला के मखाना को मिली वैश्विक पहचान, रोजगार का बन रहा मजबूत आधार : गोपाल जी ठाकुर
मखाना मिथिला की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय महोत्सव का आयोजन गौरव की बात
दरभंगा : शरद पूर्णिमा एवं कोजागरा के पावन अवसर पर रविवार को राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा में राष्ट्रीय मखाना महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। दरभंगा के सांसद सह लोकसभा में भाजपा के सचेतक डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मखाना किसानों एवं उद्यमियों को पाग, अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिथिला के मखाना को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक पहचान भी मिली है। मखाना मिथिला की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार है। राष्ट्रीय स्तर पर मखाना महोत्सव का आयोजन होना पूरे मिथिला के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि मखाना के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मिथिला का मखाना आज सुपरफूड के रूप में देश-दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है। इसके निर्यात और बाजार विस्तार की संभावनाएं भी काफी व्यापक हैं।
सांसद ने मखाना अनुसंधान केंद्र को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने की दिशा में किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि मखाना के विकास के लिए किसानों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों के साथ मिलकर निरंतर प्रयास किए जाते रहेंगे।
मखाना की खेती का रकबा तीन गुना बढ़ा
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवालीवाले ने कहा कि पिछले एक दशक में संस्थान के अनुसंधान एवं प्रसार कार्यों के परिणामस्वरूप मखाना की खेती का क्षेत्रफल लगभग तीन गुना बढ़ा है। संस्थान मखाना की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, उन्नत तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने तथा किसानों और उद्यमियों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा है।
उन्होंने किसानों से 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक चलने वाले ‘खेत बचाओ अभियान’ से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रमों का लाभ उठाकर किसान खेती से संबंधित नवीन तकनीकों और जानकारियों से लाभान्वित हो सकते हैं।
किसानों और मिथिला कला से जुड़े उद्यमियों को किया सम्मानित
महोत्सव के दौरान प्रगतिशील मखाना किसानों अमरजीत सहनी, महेश्वर ठाकुर, कपिलदेव झा, महेश मुखिया, शुभचंद मिश्रा एवं पूजा कुमारी को सम्मानित किया गया। वहीं, मिथिला चित्रकला के माध्यम से उद्यमिता और कला संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए मिथिला कला केंद्र की नीतू साह तथा मिथिलाकृति हब की प्रीति को सम्मानित किया गया।
महोत्सव में आयोजित प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। इसमें बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों से 500 से अधिक किसानों एवं उद्यमियों ने भाग लिया। प्रदर्शनी के माध्यम से मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और इससे जुड़े उद्यमों की संभावनाओं को सामने रखा गया।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक अमरनाथ गामी, राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. विकास दास, सीफेट लुधियाना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आरके विश्वकर्मा, आईसीएआर पटना के डॉ. संजीव कुमार, प्रो. विद्यानाथ झा सहित कई गणमान्य व्यक्ति, वैज्ञानिक, किसान, उद्यमी एवं अन्य हितधारक उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन आयोजन सचिव एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रधान वैज्ञानिक एवं संयोजक डॉ. आईएस सिंह ने किया।
