अप्रकाशित रचनाओं के प्रकाशन का परिजनों ने लिया संकल्प, साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि
दरभंगा : मैथिली साहित्य के वरेण्य साहित्यकार पं. विष्णुदेव झा विकल की तीसरी पुण्यतिथि पर शनिवार को उनके पैतृक गांव आसी में विकल स्मृति पर्व का आयोजन किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा की अध्यक्षता में आयोजित समारोह का शुभारंभ पं. गंधर्व झा की वेदध्वनि से हुआ। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों एवं प्रबुद्धजनों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके साहित्यिक अवदान को याद किया।
समारोह को संबोधित करते हुए टटुआर पंचायत के पूर्व मुखिया प्रो. जीवकांत मिश्र ने स्व. विकल के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे उच्च कोटि के साहित्यकार और आंदोलनकारी होने के साथ-साथ तंत्र विद्या के सिद्ध साधक भी थे।
वरिष्ठ पत्रकार विष्णु कुमार झा ने उनके सृजन कर्म की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि उनका रचना संसार व्यापक था। उनकी रचनाएं सामाजिक चेतना के जागरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विद्यापति सेवा संस्थान के मीडिया संयोजक डॉ. प्रवीण कुमार झा ने कहा कि विकल जी की अप्रकाशित कृतियों को प्रकाशित करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने पं. विष्णुदेव झा विकल के विस्तृत रचना संसार और उनके साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उनके पुत्रों ने स्व. विकल की अप्रकाशित रचनाओं को प्रकाशित कराने का संकल्प दोहराया।
शंभुनाथ मिश्र आसी के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में शारदानंद सिंह, संजीव कुमार मिश्र एवं स्व. विकल की पुत्री नेहा चौधरी ने पद्यात्मक शैली में श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मौके पर गुड़िया कुमारी, सुनील मिश्र, राजीव चौधरी सहित अनेक लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।
समारोह में वक्ताओं ने स्व. विकल के साहित्यिक अवदान को संरक्षित करने तथा उनकी अप्रकाशित रचनाओं को पाठकों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
